शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

विकीलीक्स पर हंगामा मचाने वाले कौन हैं जूलियन असांज?

जूलियन असांज
वो अकसर यात्राओं पर रहते हैं और विकीलीक्स को अलग-अलग जगहों से चलाते रहते हैं.
अपनी वेबसाइट विकीलीक्स के ज़रिए इराक़, अफ़ग़ानिस्तान युद्ध और अमरीका से जुड़े ख़ुफ़िया दस्तावेज़ जारी कर जूलियन असांज दुनिया भर में मशहूर हो गए.
दुनियाभर में उनके लाखों प्रशंसक हैं और विश्व के कई देश अब उन्हें अपने रास्ते की रुकावट मानते हैं, लेकिन विकीलीक्स की खोज करने वाले जूलियन असांज आखिर हैं कौन?
जूलियन के साथ काम करने वालों की मानें तो वो कंप्यूटर-कोडिंग के महारथी एक ऐसे एक शख्स हैं जिनकी बुद्धिमता और लगन ने उन्हें इस मुकाम पर खड़ा किया है.
आलोचक कहते हैं कि वो प्रचार के भूखे हैं और प्रशंसक उन्हें सच का सिपाही मानते हैं, लेकिन जूलियन के लिए उनका लक्ष्य ही ज़िंदगी में आगे बढ़ने का एकमात्र मक़सद है.
जूलियन अकसर यात्रा करते रहते हैं और विकीलीक्स को अलग-अलग जगहों से चलाते हैं.
कई घंटों तक बिना खाए, बिना सोए काम में जुटे रहना अब उनकी आदत बन चुकी है. न्यूयॉर्कर मैगज़ीन के एक रिपोर्टर ने उनके साथ कई हफ़्ते बिताए.
उनका कहना है, ''वो अपने आस-पास एक ऐसा माहौल बना लेते हैं कि उनके साथ जुड़े लोग हर क़ीमत पर उनकी मदद और उनके काम के लिए तैयार रहते हैं. शायद ये उनके व्यक्तित्व का ही कमाल है.''
जूलियन का जन्म 1971 में उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में हुआ. माता-पिता रंगमंच से जुड़े़ थे इसलिए उनका बचपन अलग-अलग जगहों पर अलग माहौल में बीता.
18 साल की उम्र में वो पिता बन गए और पत्नी के साथ विलगाव के बाद बच्चे के क़ानूनी संरक्षण के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी.

हुनर को आज़माया

इंटरनेट के विकास ने उन्हें गणित के अपने हुनर को आज़माने की ओर प्रेरित किया.
कंप्यूर हैक करने की अपनी एक कोशिश के दौरान वो पकड़े भी गए लेकिन उन्होंने अपना काम और कंप्यूटर के क्षेत्र में अनुसंधान जारी रखे.
विकीलीक्स की शुरुआत 2006 में हुई जब जूलियन के साथ कंप्यूटर कोडिंग के कुछ महारथी जुड़ गए. इनका मक़सद था एक ऐसी वेबसाइट बनाना जो उन दस्तावेज़ों को जारी करे जो कंप्यूटर हैक कर पाए गए हैं.
बीबीसी से हुई एक बातचीत में असांज ने कहा था, ''अपने स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए हमें अलग-अलग देशों से काम किया. अपने संसाधनों और टीमों को भी हम अलग-अलग जगह ले गए, ताकि क़ानूनी रुप से सुरक्षित रह सकें. अब हम ये सब करना सीख गए हैं. आज तक न हमने कोई केस हारा है न ही अपने किसी स्रोत को खोया है.''
जानकार मानते हैं कि विकीलीक्स के काम करने के तरीक़ों के बारे में अब भी बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं है.
इस पूरे मामले में एक अजीब मोड़ आया जब जूलियन पर यौन-दुर्व्यवहार के आरोप लगे.
स्वीडन में लगे बलात्कार और यौन-दुर्व्यवहार के इन आरोपों को लेकर जूलियन के वकीलों का कहना है कि ये संबंध पूरी तरह सहमति पर आधारित थे.
जूलियन का मानना है कि ये उनकी छवि खराब करने की एक कोशिश है ताकि वो अपने काम से पीछे हट जाएं.

शनिवार, 1 नवंबर 2008

अंग्रेजी महीनों के नाम की व्युत्पत्ति

क्या आप जानते हैं कि अंगेजी महीनों के नाम की व्युत्पत्ति कहां, कब और कैसे हुई। यह तो सभी को मालूम है कि समय नापने और उसका हिसाब रखने की आवश्यकता मनुष्य को उसके विकास के अत्यन्त प्रारम्भिक काल में ही पड़ी थी। आज हमारे पास समय को नापने के जितने भी रूप या साधन हैं, उनमें से कुछ तो प्राकृतिक हैं और कुछ कृत्रिम। प्राकृतिक रूपों व साधनों में दिन-रात, पक्ष, महीना तथा वर्ष हैं और कृत्रिम साधनों में घंटा, मिनट सेकेंड तथा सप्ताह आदि हैं।वैज्ञानिक दृष्टि से वर्ष 365.242199 दिनों का या 12.36827 महीनों का और महीना 29.530580 दिनों का होता है। वर्ष, महीना तथा दिन के आधार पर समय को नापने के लिए विश्व में अनेक कैलेंडर प्रचलन में हैं। भारत में विक्रम, शक आदि 33 से भी ऊपर कैलेंडर या संवत् प्रचलित रहे हैं। कुछ प्रमुख कैलेंडर इक्सेसिएस्टिकल (Ecclesiastical), चीनी, मिश्री, बेबिलोनी, सुमेरी, यूनानी, रोमन, मुसलमानी तथा मेक्सिकन अदि हैं। अंग्रेजी महीनों का संबंध रोमन कैलेंडर से है। वर्तमान में रोमन कैलेंडर ही विश्व में सर्वाधिक प्रचलित हैं।
रोमन कैलेंडर का आरंभ 800 वर्ष ईसा पूर्व या उससे भी पूर्व हुआ था। कुछ लोग इसका आरंभ रोमुलस से मानते हैं। कुछ अन्य लोग एट्रुस्कन (Etruscan) वंश से इसका संबंध जोड़ते हैं। कई प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि प्रारंभ में रोमन कैलेंडर का वर्ष 304 दिनों का होता था और वर्ष में मात्र 10 माह होते थे। ये 10 माह व उनके दिनों की संख्या निम्नवत् होती थी :क्रमांक माह दिनों की संख्या1. मार्टिअस (Martius) 312. एप्रिलिस (Aprilis) 293. माइअस (Maius) 314. जूनिअस (Junius) 305. क्विन्टिलिस (Quintilis) 316. सेक्सटिलिस (Sextilis) 307. सेप्टेम्बर (September) 308. आक्टोबर (October) 319. नवम्बर (November) 3110.दिसम्बर (December) 30
अक्सर आज हम लोगों को आश्चर्य होता है कि 12वें माह का नाम दिसम्बर, 11वें माह का नाम नवम्बर, 10वें माह का नाम अक्टूबर तथा 9वें माह का नाम सितम्बर क्यूं हैं। तो हम बता दें कि यह तब की बात है जब वर्ष में 10 माह ही होते थे और ये क्रमश: 10वें, 9वें, 8वें तथा 7वें स्थान पर थे। इन स्थानों पर स्थित होने के कारण इनका नामन हुआ था, परन्तु आज जब वर्ष में 12 माह हो गए हैं फिर भी इनके नामकरण में बदलाव नहीं आया, क्यूं ?
यहां उपर्युक्त से ज्ञात होता है कि पहले वर्ष का प्रारंभ मार्टिअस (मार्च) से होता था। लगभग 700 वर्ष पूर्व न्यूमा पाम्पिलिअस (Numa Pompilius) नामक राजा ने दिसम्बर के बाद जैनुअरिअस (Januarius) तथा फेब्रुअरिअस (Februarius) नामक दो माह और जोड़ कर वर्ष को 12 माह का कर दिया। लगभग 414 ई. पूर्व में दस मजिस्ट्रेटों की समिति ने जनवरी और फरवरी को वर्ष का क्रमश: पहले एवं दूसरे माह की मान्यता प्रदान की। साथ ही, फरवरी महीने को 28 दिन का निश्चित भी कर दिया। फिर भी कैलेंडर का स्वरूप अभी भी ठीक नहीं था क्योंकि कैलेंडर के अनुसार माह मौसम से दूर होते जा रहे थे। जूलियस सीजर के समय में लोगों ने यह बात पुरजोर से उठाई। परिणमत: सीजर के अथक प्रयास से वर्ष 365 दिन 6 घंटों का माना गया, जो पहली जनवरी 45 ई पूर्व से लागू हुआ। सीजर ने कैलेंडर में माह को इस प्रकार दिन आबंटित किए :-क्रमांक माह दिनों की संख्या1. जेनुअरी (January) 312. फेब्रुअरी (February) 29-303. मार्टिअस (Martius) 314. एप्रिलिस (Aprilis) 305. माइअस (Maius) 316. जूनिअस (Junius) 307. क्विन्टिलिस (Quintilis) 318. सेक्सटिलिस (Sextilis) 309. सेप्टेम्बर (September) 3110.आक्टोबर (October) 3011.नवम्बर (November) 3112.दिसम्बर (December) 30
रोमन कैलेंडर का यह रूप जूलियन कैलेंडर कहलाता है। 44 ई. पूर्व में सातवें अर्थात क्विन्टिलिस (Quintilis) माह को जूलियस सीजर की कैलेंडर विषयक एवं अन्य क्षेत्रों में महान उपलब्धि को ध्यान में रखते हुए जूलियस (Julius) कहा गया, जो अंग्रेजी में जुलाई (July) हो गया।
8 ई. पूर्व में प्रथम रोमन सम्राट आगस्तस सीजर ने कैलेंडर में फिर परिवर्तन किया। इसमें उल्लेखनीय दो बातें हैं :-
1. 8वें अर्थात सेक्सटिलिस (Sextilis) माह का नाम अपने नाम के आधार पर आगस्तस (Augustus) रखवाया।
2. आगस्तस (Augustus) माह में पहले 30 दिन होते थे। इसने दिनों की संख्या 31 करा दी। इस कारण कुछ अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन भी करने पड़े, जैसे फेब्रुअरी(February) में 29-30 दिन के स्थान पर 28-29 दिन किया गया।
एकरूपता लाने की दृष्टि से सेप्टेम्बर (September) में 31 के स्थान पर 30 दिन, आक्टोबर (October) में 30 के स्थान पर 31 दिन, नवम्बर (November) में 31 के स्थान पर 30 दिन और दिसम्बर (December) में 30 के स्थान पर 31 दिन कर दिया गया। तब से यही क्रम चला आ रहा है।
जूलियन वर्ष, जैसाकि कहा जा चुका है 365 दिन 6 घंटे का निश्चित किया गया था, किन्तु वस्तुत वर्ष इससे 11 मिनट 14 सेकेंड कम का होता था। परिणामत: कैलेंडर में भी कुछ गड़बड़ियां होने लगीं। इन्हें दूर करने के लिए पोप ग्रीगरी-13 ने फरवरी 1582 में इसमें फिर कुछ सुधार किए। उन्हीं के नाम पर अब यह कैलेंडर ग्रीगोरियन भी कहलाता है। लेकिन यह कैलेंडर भी शुध्दता की दृष्टि से ठीक नही है। इसमें वर्ष प्राकृतिक वर्ष से 26 सेकेंड बड़ा है फिर भी यह बहुत बड़ी गड़बड़ी नही है क्योंकि 3323 वर्ष बीतने के पश्चात ही एक दिन बढ़ सकेगा।
अंग्रेजी महीनों की व्युत्पत्ति कहां से हुई ? इस बारे में हमारे मन में जिज्ञासा सी बनी रहती है। आइए इसकी व्युत्पत्ति के विषय में भी हम जानें :-
1. जनवरी (January)इस नाम का आधार रोमन देवता जेनस(Janus) हैं। जेनस भारतीय देवता गणेश के नाम से मिलते जुलते हैं। जैसे कि भारत में किसी शुभ कार्य की शुरूआत गणेश से होती है वैसे ही रोम में किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत जेनस से होती है। इस देवता के दो मुख होते हैं- एक आगे की ओर देखता है और दूसरा पीछे की ओर। यह अच्छा प्रतीक है। एक मुख बीतने वाले वर्ष की ओर अभिमुख है और दूसरा आने वाले वर्ष की ओर। January शब्द लैटिन Januarius से संबध्द है, जिसका अर्थ है -”जेनस का”.
अंग्रेजी में 18वीं सदी के पूर्व January माह को Wulf monath अर्थात “भेड़िए का महीना” कहते थे क्योंकि इस महीने में भेड़िए खाने की तलाश में बस्तियों में घुस आया करते थे।
2. फरवरी (February)फरवरी शब्द का संबंध लैटिन शब्द Februarius से माना गया है। यह शब्द Februa से बना हे, जिसका अर्थ है “शुद्धि की दावत”. Februa के आधार पर Februarius कहा गया.
फरवरी शब्द अंग्रेजी में आने से पूर्व इस महीने को Sporte kale monath अर्थात “पात गोभी के उगने का महीना” कहा जाता था, क्योंकि इस महीने इंग्लैंड में पातगोभी बहुतायात मात्रा में उगती थी।
3. मार्च (March)इस शब्द का संबंध मूलत: Martius से है। Martius नाम इस माह को रोमन लोगों ने युद्ध के देवता मार्टिस Martis (लैटिन एवं अंग्रेजी में Mars(मंगल) कहते हैं।) के नाम पर दिया। इसी महीने सर्दियों के पश्चात बसंत का आगमन होता है और लोग शत्रु पर आक्रमण करना प्रारंभ करते थे। इस प्रकार यह “युद्ध का महीना” था। अत: इसका नामकरण युध्द देवता Mars या Martius के आधार पर हुआ, जो आगे चलकर Marz बना, जो पुरानी फ्रेंच तथा अंग्रेजी में March हो गया।
मार्च को पहले अंग्रेजी में Hlyd monath अर्थात तेज हवा का महीना कहते थे। इस महीने इंग्लैंड में तेज हवाएं चला करती थीं। इसका एक दूसरा नाम Lencten monath भी था, जिसका अर्थ है “बड़ा होने का महीना”। इस महीने से दिन बड़े होने लगते हैं।
4. अप्रैल (April)अंग्रेजी April शब्द का संबंध लैटिन शब्द Aprilis से है। इस शब्द की व्युत्पत्ति प्राय: अनिश्चित मानी गई है, परन्तु अधिकांश लोग इसे लैटिन शब्द Aperire से संबध्द मानते हैं, जिसका अर्थ खुलना होता है। प्राचीन रोम में यह कलियों के खिलकर फूल बनने का महीना था। शेक्सपियर के The aprils in her eyes में इसी ओर संकेत है। आधुनिक ग्रीक भाषा में Anoiris वसंत को कहते हैं किन्तु इसका मूल अर्थ “खुला या खोला हुआ” है। इससे भी उपर्युक्त व्युत्पत्ति को बल मिलता है।
अंग्रेजी में पहले इस माह को Easter monath या “ईस्टर का महीना” कहते थे।
5. मई (May)इसका संबंध लैटिन शब्द Maius तथा प्राचीन फ्रांसीसी शब्द Mai से है। इसकी व्युत्पत्ति विवादास्पद है। कुछ विद्वानों के अनुसार रोम के बड़े-बूढ़े तथा रईस Majoris कहलाते थे, उन्हीं के सम्मान में लैटिन में मई महीने को Maius कहा गया। कुछ विद्वान इसकी दूसरी व्युत्पत्ति देते हैं कि रोमनों की एक देवी मेया Maia थी, जो हरमीज एवं मर्करी की मां थी। उन्हीं के नाम पर लैटिन में यह महीना Maius कहलाया।
May के प्रचलन से पूर्व अंग्रेजी में इस महीने का नाम Thri milce अर्थात “तीन बार दूहने का महीना” था। इस नाम का कारण यह था कि मई के दिन बड़े होते हैं, अत: गाएं दिन में तीन बार दूही जा सकती हैं।
6. जून (June)अंग्रेजी जून शब्द लैटिन Junius एवं फ्रांसीसी Juin से निकला है। इसके लैटिन नाम Junius की व्युत्पत्ति के संबंध में विवाद है। पहला मत- इस शब्द का संबंध रोमीय परिवार के नाम Junius से है, जिन्होने जूलियस सीजर को मारने में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसी परिवार के नाम के आधार पर यह नाम पड़ा। देसरा मत- स्त्रियों की (रोमनों में) अधिष्ठात्री देवी Juno के आधार पर यह नाम पड़ा। इसी कारण यह महीना “विवाह का महीना” समझा जाता है। तीसरा मत- Junius का संबंध लैटिन शब्द Jungo से है, जिसका अर्थ “जोड़ना” है। यह महीना पति-पत्नी को जोड़ता है अर्थात उनका विवाह संपन्न कराता है। चौथा मत- प्राचीन रोम में प्रथम कॉन्सल (न्यायाधीश) Junius Brutus थे। उन्ही के नाम पर यह नाम पड़ा। पांचवां मत- लैटिन में gens का अर्थ घ्परिवारङ है। इस माह में चूंकि विवाह होते हैं अर्थात एक नए परिवार का गठन होता हे। अत: Gens के आधार पर इसे Junius कहा गया। अधिक मान्यता Juno (जूनो) देवी वाले मत को मिली है।
पहले अंग्रेजी में जून को Sere Monath अर्थात “सूखा महीना” कहा जाता था।
7. जुलाई (July)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह वर्ष का पांचवा महीना था इसीलिए इसका लैटिन नाम Quintilis अर्थात “पांचवा” था। बाद में जनवरी और फरवरी दो नए माह जुड़ जाने के बाबजूद इसका नाम पूर्ववत रहा। परन्तु जब 44 ई. पू. में जूलियस सीजर की हत्या के पश्चात उनके सम्मान में तत्कालीन सेनापति मार्क ऐन्टनी ने रोम की सीनेट के समक्ष एक प्रस्ताव रखा कि वर्ष का एक महीना जूलियस सीजर के नाम पर रख दिया जाए। चूंकि सीजर का जन्म Quintilis माह में हुआ था। अत: सीनेट ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए Quintilis को जूलियस नाम प्रदान कर दिया। लैटिन Julius को अंग्रेजी में Julie लिखा जाता था जो बाद में परिष्कृत होकर July हो गया।
पहले इस महीने को अंग्रेजी में Heg Monath (सूखी घास) या हे (Hay) का महीना या Maed Monath (घास के मैदान या चारागाह का महीना) कहा जाता था। इस महीने मवेशी चारागाह में रहते थे तथा घास सुखाने के लिए काटी जाती थी।
8. अगस्त (August)प्राचीन रोमनों का यह छठा महीना था, इसीलिए इसका लैटिन नाम Sextilis अर्थात छठवां महीना था। बाद में जनवरी और फरवरी जुड़ने पर आठवां महीना होने के बाबजूद यह Sextilis ही प्रचलन में रहा। जूलियस सीजर के पश्चात जब उसका भतीजा ऑक्टेवियन (Octavion) रोम का सम्राट बना तो उसने रोम साम्राज्य की काफी उन्नति की। इससे प्रसन्न होकर तत्कालीन सीनेट ने इनको Augustus (महान, श्रध्दा का पात्र, भव्य) की उपाधि से विभूषित किया। वह अपने चाचा के समान ही ख्याति प्राप्त करना चाहता था। चूंकि ऑक्टेवियन ने Sextilis महीने में अनेक बड़े-2 कार्यों को अंजाम दिए। यह महीना उसके लिए सौभाग्यशाली था। अत: सीनेट ने ऑक्टेवियन की इच्छानुसार Sextilis माह का नाम Augustus रखने का विनिश्चय किया। तभी से यानि 8 ई.पू. से यह माह Augustus कहा जाने लगा।
अंग्रेजी में पहले इस महीने को Weod Monath अर्थात Weed का महीना कहा जाता था। उस समय Weed शब्द आज के अर्थ “घास फूस निकालना, कूड़ा करकट साफ करना आदि” न होकर सामान्य रूप से “हरी पत्तियों आदि” के लिए प्रयुक्त होता था। इस प्रकार यह ’हरी पत्तियों का महीना” था।
9. सितम्बर (September)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह सातवां महीना था। अत: सात के लिए लैटिन शब्द Septem के आधार पर इसे सातवां महीना अर्थात September कहा गया। बाद में जब यह नवां महीना हो गया तब भी इसका नाम September ही रहा। यद्यपि रोम सीनेट इसके पक्ष में नही थी। इसी गड़बड़ी के कारण यूरोप में बहुतों ने इस नाम को नही अपनाया। स्विटजरलैंड में अब भी यह Herbst Monat अर्थात हार्वेस्ट मंथ (जौ का महीना) है। हार्वेस्ट का मूल अर्थ जई या जौ है। पहले अंग्रेजी में भी इसे Haerfest Monath अर्थात “जौ का महीना” ही कहा जाता था।
10. अक्टूबर (October)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह महीना आठवें स्थान पर था। इस आठवें महीने को लैटिन Octo अर्थात आठ के आधार पर October कहा गया था। बाद में जब वर्ष में 12 महीने होने के पश्चात यह 10वें माह के रूप में परिवर्तित हुआ, तब भी इसका नाम October ही प्रचलन में रहा। रोमन सेनापति Germanicus Caesar ने अपने नाम के आधार पर जर्मेनिकस करने का काफी प्रयास किया परन्तु उनकी चल न सकी। इसी प्रकार इस महीने के लिए विभिन्न लोगों ने एंटोनिनस(Antoninus), हरक्यूलियस(Herculeus), कमोडस (Commodus), फास्टिनस(Faustinus) आदि अन्य नाम देने चाहे, परन्तु वह प्रचलन में नही आ सके।
11. नवम्बर (November)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह नवां महीना था। अत: लैटिन Novem अर्थात नौ के आधार पर इस नवें महीने को लैटिन में November या Novembris कहा गया। बाद में वर्ष में 12 महीने हो जाने पर यह 11वां महीना हो गया, तब भी यही नाम प्रचलित रहा।
इसे पहले अंग्रेजी में Blod Monath अथवा Blot Monath अर्थात “रक्त मांस या बलिदान का महीना” कहा जाता था। कुछ लोग तेज हवा बहने के कारण इसे Wind Monath “हवा का महीना” भी कहते थे।
12. दिसम्बर (December)प्राचीन रोमन कैलेंडर में जब वर्ष में दस माह होते थे तो यह दसवां महीना था। लैटिन Decem अर्थात दस के आधार पर इस महीने को December (दिसम्बर) कहा गया। बाद में जब वर्ष में 12 महीने हो गए और इसे 12वें स्थान पर आना पड़ा तब भी इसके नाम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया और यह दिसम्बर ही कहलाया। काफी लोगों ने प्रयास किया कि इसके नाम में परिवर्तन किया जाए परन्तु कोई भी सफल नहीं हो पाया। प्रसिध्द रोमन सम्राट लूसियस अपनी पत्नी के नाम पर इसे Amazonius करना चाहते थे परन्तु तत्कालीन सीनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
पहले अंग्रेजी में इस माह को Mid-Winter-Monath अर्थात मध्य-शीत मास या Winter Monath शीत मास कहा जाता था। ईसाई लोग ईसा के जन्म के कारण इसे Haligh Monath अर्थात “पवित्र मास” कहते थे। जर्मन अब भी इसे Christ Monat कहते हैं।
अगर यह लेख आपको अच्छा लगा तो लिखना सार्थक होगा.

जुआ: एक सामाजिक बुराई और मान्यता

बचपन से सुनता आ रहा हूं कि जुआ और शराब बुरी बला है. इससे घर बर्बाद होते हैं. आबाद होने की बात तो कहीं सुनने को मिलती ही नहीं. चाहे बात महाभारत काल की हो अथवा आधुनिक युग की हो. इससे बर्बाद होने की कहानी ही सुनने को मिली है. सारा समाज भी जानता-बूझता है, फ़िर भी इसे अपनाता है. जुए कोसमाज ने एक सामाजिक बुराई के रूप में प्रतिपादित किया गया है और साथ ही साथ कई मौको पर इसे खेलने की मान्यता भी दे दी है. ऎसा क्यूं? मेरी समझ में तो बिलकुल भी नहीं आता. अभी देखिए दीवाली पर कितनों के घर इसी जुए के कारण अंधेरे में रहे. लक्ष्मी लाने के चक्कर में जो थोड़ी बहुत पूंजी थी वह भी गंवा दी. दीवाली में जुआ खेलने की मान्यता प्रदान की गई है. इसलिए दीवाली की रात कई घरों, मोहल्लों, गलियों में लोगों को मैंने जुआ खेलते पाया. अब तो बकायदा क्लबों में बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी बड़े शान ओ शौकत जुआ खेलते हुए पाए जाते हैं. सब जानते-बूझते लोग इस बुराई को अपनाने पर तुले हुए हैं. उनसे बात करने पर कहीं से भी उन्हें आत्मग्लानि का अनुभव नहीं होता. और तो और बिडम्वना देखिए आप उनको इस बुराई से बचने की सलाह देंगे तो वे आपको इस बुराई में शामिल होने का दबाव बनाएंगे.ऎसे लोगों को सलाह देना- राम-राम

लक्ष्मी स्पेशल: वार्षिक निरीक्षण

दीवाली पर लक्ष्मी माता का वार्षिक निरीक्षण होना है। इसका संदेश सर्वसंबंधित को प्रसारित कर दिया गया। इस पर बकायदा रूट-चार्ट जारी किया गया कि लक्ष्मी स्पेशल अपने होम स्टेशन से अमावस्या की काली रात को फलां बजे प्रस्थान करेगी और कब-कब कहां-कहां पहुंचेगी। इस निरीक्षण स्पेशल में लक्ष्मी माता अपने सेकेट्री मि. उल्लू जी एवं गणेश भगवान अपने सेकेट्री मि. चूहे जी सहित प्रमुख विभागों के देवी-देवता भी रहेंगे। उनकी आवभगत कैसे करनी है, यह अंडरस्टुड रहेगा।
यह संदेश प्रसारित होते ही लोगों में खलबली सी मच गई। निरीक्षण के एक माह पूर्व से ही लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई, रंग-रोगन कराने में जुट गए। जो ज्यादा सार्मथ्यवान थे, उन्होंने ठेकेदारों को बुलाकर इस कार्य का ठेका दे दिया। ठेकेदार महोदय भी संबंधित दुकानदारों से तय-तमाम (मेरा आशय कमीशन तय करने से है) करके मंहगा डिस्टेम्पर लगवाया। जो थोड़ा कम सार्मथ्यवान थे, उनका घर कम दाम वाले डिस्टेम्पर से चमकाया गया। जो उनसे भी गरीब थे, उन्होंने अपना घर समोशन से पुतवाया। जो एकदम गरीब थे, वे खुद ही कूंची लेकर अपना-अपना घर चूने से पोतने में जुट गए। गांव में जिनके घर कच्चे थे तथा मिट्टी से बने थे, वे गाय-भैंस की पोटी (मेरा आशय गोबर से है) से ही लिपायी करने में जुट गए। सभी का एक ही उद्देश्य- लक्ष्मी माता के वार्षिक निरीक्षण में अपना घर साफ-सुथरा दिखाना, जिससे कि लक्ष्मी माता प्रसन्न होकर उनको पुरस्कार स्वरूप कुछ दे जाएं। इस पुरस्कार पाने की होड़ में न सिर्फ वे शामिल थे, जो पात्र होते हुए भी अब तक पुरस्कार पाने से वंचित रह गए थे बल्कि वे भी शामिल थे जो लक्ष्मी माता के कृपापात्र थे और प्रतिवर्ष पुरस्कार पाते रहते थे।
यह फंडा मेरी समझ से बाहर था कि लक्ष्मी माता अपने वार्षिक निरीक्षण में उन्हीं बड़े घरों को क्यों पुरस्कृत करती रहती हैं, जो सार्मथ्यवान हैं, जिनके पास इस कार्य के लिए मैन-पावर है, मनी-पावर है। उन घरों को क्यों नहीं पुरस्कृत करती, जिन्होंने अपने सीमित संसाधनों से अपने सार्मथ्य के अनुसार अपने घरों को साफ-सुथरा किया है। भई, किसी गरीब ने अपने मिट्टी के घर को चाहे गाय-भंैस के गोबर से ही सही लिपाई-पुताई की है। है तो वह घर भी साफ-सुथरा। उनके पास न तो मैनपावर है और न ही मनीपावर। यह पक्षपात क्यों?
मेरी समझ में तो यह आता है कि सार्मथ्यवान द्वारा लक्ष्मी माता को चढ़ाया गया पूजा-भेंट (गिफ्ट) एक गरीब की तुलना में काफी अधिक होता है। शायद इसीलिए लक्ष्मी माता की कृपा दृष्टि एक गरीब की तुलना में सार्मथ्यवान पर अधिक रहती है। कहा भी जाता है पैसा ही पैसे को खीचता है। जबकि मेरी समझ से ऐसा होना चाहिए था कि जो सार्मथ्यवान पिछले कई वर्षों से पुरस्कार प्राप्त कर रहे हैं उनको यदि एक वर्ष न भी दिया जाए तो उनको कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है वे तो पूजा-भेंट चढ़ाएंगे ही। इस वर्ष कुछ गरीबों को पुरस्कार प्राप्त करने वालों में शामिल कर लिया जाए तो भेंट (गिफ्ट) की संख्या में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत लक्ष्मी माता कार्यालय से मांगी गई सूचना के आधार पर पता चला है कि देश के नामी-गिरामी सार्मथ्यवानों के धन में पिछले वर्ष की तुलना कई गुना वृद्धि हो गई है और वहीं गांव में रहने वाले गरीब किसान के धन में पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना ह्रास हुआ है।
इस वर्ष लक्ष्मी माता के वार्षिक निरीक्षण के अवसर पर मुझ जैसे कई याचियों ने ज्ञापन देकर उनसे निवेदन किया है कि इस वर्ष उन सार्मथ्यवानों, जिनकों विगत कई वर्षों से पुरस्कृत किया जाता रहा है, की अपेक्षा हम जैसे कुछ गरीबों को पुरस्कृत करने की कृपा करें, जिससे कि हम भी धीरूभाई अंबानी बन सकें और हमारी पीढ़ियां भी आपको पूजा-भेंट चढ़ाती रहें।जय हो लक्ष्मी माता की।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2008

जुआ: एक सामाजिक बुराई और मान्यता

बचपन से सुनता आ रहा हूं कि जुआ और शराब बुरी बला है. इससे घर बर्बाद होते हैं. आबाद होने की बात तो कहीं सुनने को मिलती ही नहीं. चाहे बात महाभारत काल की हो अथवा आधुनिक युग की हो. इससे बर्बाद होने की कहानी ही सुनने को मिली है. सारा समाज भी जानता-बूझता है, फ़िर भी इसे अपनाता है. जुए कोसमाज ने एक सामाजिक बुराई के रूप में प्रतिपादित किया गया है और साथ ही साथ कई मौको पर इसे खेलने की मान्यता भी दे दी है. ऎसा क्यूं? मेरी समझ में तो बिलकुल भी नहीं आता. अभी देखिए दीवाली पर कितनों के घर इसी जुए के कारण अंधेरे में रहे. लक्ष्मी लाने के चक्कर में जो थोड़ी बहुत पूंजी थी वह भी गंवा दी. दीवाली में जुआ खेलने की मान्यता प्रदान की गई है. इसलिए दीवाली की रात कई घरों, मोहल्लों, गलियों में लोगों को मैंने जुआ खेलते पाया. अब तो बकायदा क्लबों में बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी बड़े शान ओ शौकत जुआ खेलते हुए पाए जाते हैं. सब जानते-बूझते लोग इस बुराई को अपनाने पर तुले हुए हैं. उनसे बात करने पर कहीं से भी उन्हें आत्मग्लानि का अनुभव नहीं होता. और तो और बिडम्वना देखिए आप उनको इस बुराई से बचने की सलाह देंगे तो वे आपको इस बुराई में शामिल होने का दबाव बनाएंगे.
ऎसे लोगों को सलाह देना- राम-राम