क्या आप जानते हैं कि अंगेजी महीनों के नाम की व्युत्पत्ति कहां, कब और कैसे हुई। यह तो सभी को मालूम है कि समय नापने और उसका हिसाब रखने की आवश्यकता मनुष्य को उसके विकास के अत्यन्त प्रारम्भिक काल में ही पड़ी थी। आज हमारे पास समय को नापने के जितने भी रूप या साधन हैं, उनमें से कुछ तो प्राकृतिक हैं और कुछ कृत्रिम। प्राकृतिक रूपों व साधनों में दिन-रात, पक्ष, महीना तथा वर्ष हैं और कृत्रिम साधनों में घंटा, मिनट सेकेंड तथा सप्ताह आदि हैं।वैज्ञानिक दृष्टि से वर्ष 365.242199 दिनों का या 12.36827 महीनों का और महीना 29.530580 दिनों का होता है। वर्ष, महीना तथा दिन के आधार पर समय को नापने के लिए विश्व में अनेक कैलेंडर प्रचलन में हैं। भारत में विक्रम, शक आदि 33 से भी ऊपर कैलेंडर या संवत् प्रचलित रहे हैं। कुछ प्रमुख कैलेंडर इक्सेसिएस्टिकल (Ecclesiastical), चीनी, मिश्री, बेबिलोनी, सुमेरी, यूनानी, रोमन, मुसलमानी तथा मेक्सिकन अदि हैं। अंग्रेजी महीनों का संबंध रोमन कैलेंडर से है। वर्तमान में रोमन कैलेंडर ही विश्व में सर्वाधिक प्रचलित हैं।
रोमन कैलेंडर का आरंभ 800 वर्ष ईसा पूर्व या उससे भी पूर्व हुआ था। कुछ लोग इसका आरंभ रोमुलस से मानते हैं। कुछ अन्य लोग एट्रुस्कन (Etruscan) वंश से इसका संबंध जोड़ते हैं। कई प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि प्रारंभ में रोमन कैलेंडर का वर्ष 304 दिनों का होता था और वर्ष में मात्र 10 माह होते थे। ये 10 माह व उनके दिनों की संख्या निम्नवत् होती थी :क्रमांक माह दिनों की संख्या1. मार्टिअस (Martius) 312. एप्रिलिस (Aprilis) 293. माइअस (Maius) 314. जूनिअस (Junius) 305. क्विन्टिलिस (Quintilis) 316. सेक्सटिलिस (Sextilis) 307. सेप्टेम्बर (September) 308. आक्टोबर (October) 319. नवम्बर (November) 3110.दिसम्बर (December) 30
अक्सर आज हम लोगों को आश्चर्य होता है कि 12वें माह का नाम दिसम्बर, 11वें माह का नाम नवम्बर, 10वें माह का नाम अक्टूबर तथा 9वें माह का नाम सितम्बर क्यूं हैं। तो हम बता दें कि यह तब की बात है जब वर्ष में 10 माह ही होते थे और ये क्रमश: 10वें, 9वें, 8वें तथा 7वें स्थान पर थे। इन स्थानों पर स्थित होने के कारण इनका नामन हुआ था, परन्तु आज जब वर्ष में 12 माह हो गए हैं फिर भी इनके नामकरण में बदलाव नहीं आया, क्यूं ?
यहां उपर्युक्त से ज्ञात होता है कि पहले वर्ष का प्रारंभ मार्टिअस (मार्च) से होता था। लगभग 700 वर्ष पूर्व न्यूमा पाम्पिलिअस (Numa Pompilius) नामक राजा ने दिसम्बर के बाद जैनुअरिअस (Januarius) तथा फेब्रुअरिअस (Februarius) नामक दो माह और जोड़ कर वर्ष को 12 माह का कर दिया। लगभग 414 ई. पूर्व में दस मजिस्ट्रेटों की समिति ने जनवरी और फरवरी को वर्ष का क्रमश: पहले एवं दूसरे माह की मान्यता प्रदान की। साथ ही, फरवरी महीने को 28 दिन का निश्चित भी कर दिया। फिर भी कैलेंडर का स्वरूप अभी भी ठीक नहीं था क्योंकि कैलेंडर के अनुसार माह मौसम से दूर होते जा रहे थे। जूलियस सीजर के समय में लोगों ने यह बात पुरजोर से उठाई। परिणमत: सीजर के अथक प्रयास से वर्ष 365 दिन 6 घंटों का माना गया, जो पहली जनवरी 45 ई पूर्व से लागू हुआ। सीजर ने कैलेंडर में माह को इस प्रकार दिन आबंटित किए :-क्रमांक माह दिनों की संख्या1. जेनुअरी (January) 312. फेब्रुअरी (February) 29-303. मार्टिअस (Martius) 314. एप्रिलिस (Aprilis) 305. माइअस (Maius) 316. जूनिअस (Junius) 307. क्विन्टिलिस (Quintilis) 318. सेक्सटिलिस (Sextilis) 309. सेप्टेम्बर (September) 3110.आक्टोबर (October) 3011.नवम्बर (November) 3112.दिसम्बर (December) 30
रोमन कैलेंडर का यह रूप जूलियन कैलेंडर कहलाता है। 44 ई. पूर्व में सातवें अर्थात क्विन्टिलिस (Quintilis) माह को जूलियस सीजर की कैलेंडर विषयक एवं अन्य क्षेत्रों में महान उपलब्धि को ध्यान में रखते हुए जूलियस (Julius) कहा गया, जो अंग्रेजी में जुलाई (July) हो गया।
8 ई. पूर्व में प्रथम रोमन सम्राट आगस्तस सीजर ने कैलेंडर में फिर परिवर्तन किया। इसमें उल्लेखनीय दो बातें हैं :-
1. 8वें अर्थात सेक्सटिलिस (Sextilis) माह का नाम अपने नाम के आधार पर आगस्तस (Augustus) रखवाया।
2. आगस्तस (Augustus) माह में पहले 30 दिन होते थे। इसने दिनों की संख्या 31 करा दी। इस कारण कुछ अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन भी करने पड़े, जैसे फेब्रुअरी(February) में 29-30 दिन के स्थान पर 28-29 दिन किया गया।
एकरूपता लाने की दृष्टि से सेप्टेम्बर (September) में 31 के स्थान पर 30 दिन, आक्टोबर (October) में 30 के स्थान पर 31 दिन, नवम्बर (November) में 31 के स्थान पर 30 दिन और दिसम्बर (December) में 30 के स्थान पर 31 दिन कर दिया गया। तब से यही क्रम चला आ रहा है।
जूलियन वर्ष, जैसाकि कहा जा चुका है 365 दिन 6 घंटे का निश्चित किया गया था, किन्तु वस्तुत वर्ष इससे 11 मिनट 14 सेकेंड कम का होता था। परिणामत: कैलेंडर में भी कुछ गड़बड़ियां होने लगीं। इन्हें दूर करने के लिए पोप ग्रीगरी-13 ने फरवरी 1582 में इसमें फिर कुछ सुधार किए। उन्हीं के नाम पर अब यह कैलेंडर ग्रीगोरियन भी कहलाता है। लेकिन यह कैलेंडर भी शुध्दता की दृष्टि से ठीक नही है। इसमें वर्ष प्राकृतिक वर्ष से 26 सेकेंड बड़ा है फिर भी यह बहुत बड़ी गड़बड़ी नही है क्योंकि 3323 वर्ष बीतने के पश्चात ही एक दिन बढ़ सकेगा।
अंग्रेजी महीनों की व्युत्पत्ति कहां से हुई ? इस बारे में हमारे मन में जिज्ञासा सी बनी रहती है। आइए इसकी व्युत्पत्ति के विषय में भी हम जानें :-
1. जनवरी (January)इस नाम का आधार रोमन देवता जेनस(Janus) हैं। जेनस भारतीय देवता गणेश के नाम से मिलते जुलते हैं। जैसे कि भारत में किसी शुभ कार्य की शुरूआत गणेश से होती है वैसे ही रोम में किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत जेनस से होती है। इस देवता के दो मुख होते हैं- एक आगे की ओर देखता है और दूसरा पीछे की ओर। यह अच्छा प्रतीक है। एक मुख बीतने वाले वर्ष की ओर अभिमुख है और दूसरा आने वाले वर्ष की ओर। January शब्द लैटिन Januarius से संबध्द है, जिसका अर्थ है -”जेनस का”.
अंग्रेजी में 18वीं सदी के पूर्व January माह को Wulf monath अर्थात “भेड़िए का महीना” कहते थे क्योंकि इस महीने में भेड़िए खाने की तलाश में बस्तियों में घुस आया करते थे।
2. फरवरी (February)फरवरी शब्द का संबंध लैटिन शब्द Februarius से माना गया है। यह शब्द Februa से बना हे, जिसका अर्थ है “शुद्धि की दावत”. Februa के आधार पर Februarius कहा गया.
फरवरी शब्द अंग्रेजी में आने से पूर्व इस महीने को Sporte kale monath अर्थात “पात गोभी के उगने का महीना” कहा जाता था, क्योंकि इस महीने इंग्लैंड में पातगोभी बहुतायात मात्रा में उगती थी।
3. मार्च (March)इस शब्द का संबंध मूलत: Martius से है। Martius नाम इस माह को रोमन लोगों ने युद्ध के देवता मार्टिस Martis (लैटिन एवं अंग्रेजी में Mars(मंगल) कहते हैं।) के नाम पर दिया। इसी महीने सर्दियों के पश्चात बसंत का आगमन होता है और लोग शत्रु पर आक्रमण करना प्रारंभ करते थे। इस प्रकार यह “युद्ध का महीना” था। अत: इसका नामकरण युध्द देवता Mars या Martius के आधार पर हुआ, जो आगे चलकर Marz बना, जो पुरानी फ्रेंच तथा अंग्रेजी में March हो गया।
मार्च को पहले अंग्रेजी में Hlyd monath अर्थात तेज हवा का महीना कहते थे। इस महीने इंग्लैंड में तेज हवाएं चला करती थीं। इसका एक दूसरा नाम Lencten monath भी था, जिसका अर्थ है “बड़ा होने का महीना”। इस महीने से दिन बड़े होने लगते हैं।
4. अप्रैल (April)अंग्रेजी April शब्द का संबंध लैटिन शब्द Aprilis से है। इस शब्द की व्युत्पत्ति प्राय: अनिश्चित मानी गई है, परन्तु अधिकांश लोग इसे लैटिन शब्द Aperire से संबध्द मानते हैं, जिसका अर्थ खुलना होता है। प्राचीन रोम में यह कलियों के खिलकर फूल बनने का महीना था। शेक्सपियर के The aprils in her eyes में इसी ओर संकेत है। आधुनिक ग्रीक भाषा में Anoiris वसंत को कहते हैं किन्तु इसका मूल अर्थ “खुला या खोला हुआ” है। इससे भी उपर्युक्त व्युत्पत्ति को बल मिलता है।
अंग्रेजी में पहले इस माह को Easter monath या “ईस्टर का महीना” कहते थे।
5. मई (May)इसका संबंध लैटिन शब्द Maius तथा प्राचीन फ्रांसीसी शब्द Mai से है। इसकी व्युत्पत्ति विवादास्पद है। कुछ विद्वानों के अनुसार रोम के बड़े-बूढ़े तथा रईस Majoris कहलाते थे, उन्हीं के सम्मान में लैटिन में मई महीने को Maius कहा गया। कुछ विद्वान इसकी दूसरी व्युत्पत्ति देते हैं कि रोमनों की एक देवी मेया Maia थी, जो हरमीज एवं मर्करी की मां थी। उन्हीं के नाम पर लैटिन में यह महीना Maius कहलाया।
May के प्रचलन से पूर्व अंग्रेजी में इस महीने का नाम Thri milce अर्थात “तीन बार दूहने का महीना” था। इस नाम का कारण यह था कि मई के दिन बड़े होते हैं, अत: गाएं दिन में तीन बार दूही जा सकती हैं।
6. जून (June)अंग्रेजी जून शब्द लैटिन Junius एवं फ्रांसीसी Juin से निकला है। इसके लैटिन नाम Junius की व्युत्पत्ति के संबंध में विवाद है। पहला मत- इस शब्द का संबंध रोमीय परिवार के नाम Junius से है, जिन्होने जूलियस सीजर को मारने में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसी परिवार के नाम के आधार पर यह नाम पड़ा। देसरा मत- स्त्रियों की (रोमनों में) अधिष्ठात्री देवी Juno के आधार पर यह नाम पड़ा। इसी कारण यह महीना “विवाह का महीना” समझा जाता है। तीसरा मत- Junius का संबंध लैटिन शब्द Jungo से है, जिसका अर्थ “जोड़ना” है। यह महीना पति-पत्नी को जोड़ता है अर्थात उनका विवाह संपन्न कराता है। चौथा मत- प्राचीन रोम में प्रथम कॉन्सल (न्यायाधीश) Junius Brutus थे। उन्ही के नाम पर यह नाम पड़ा। पांचवां मत- लैटिन में gens का अर्थ घ्परिवारङ है। इस माह में चूंकि विवाह होते हैं अर्थात एक नए परिवार का गठन होता हे। अत: Gens के आधार पर इसे Junius कहा गया। अधिक मान्यता Juno (जूनो) देवी वाले मत को मिली है।
पहले अंग्रेजी में जून को Sere Monath अर्थात “सूखा महीना” कहा जाता था।
7. जुलाई (July)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह वर्ष का पांचवा महीना था इसीलिए इसका लैटिन नाम Quintilis अर्थात “पांचवा” था। बाद में जनवरी और फरवरी दो नए माह जुड़ जाने के बाबजूद इसका नाम पूर्ववत रहा। परन्तु जब 44 ई. पू. में जूलियस सीजर की हत्या के पश्चात उनके सम्मान में तत्कालीन सेनापति मार्क ऐन्टनी ने रोम की सीनेट के समक्ष एक प्रस्ताव रखा कि वर्ष का एक महीना जूलियस सीजर के नाम पर रख दिया जाए। चूंकि सीजर का जन्म Quintilis माह में हुआ था। अत: सीनेट ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए Quintilis को जूलियस नाम प्रदान कर दिया। लैटिन Julius को अंग्रेजी में Julie लिखा जाता था जो बाद में परिष्कृत होकर July हो गया।
पहले इस महीने को अंग्रेजी में Heg Monath (सूखी घास) या हे (Hay) का महीना या Maed Monath (घास के मैदान या चारागाह का महीना) कहा जाता था। इस महीने मवेशी चारागाह में रहते थे तथा घास सुखाने के लिए काटी जाती थी।
8. अगस्त (August)प्राचीन रोमनों का यह छठा महीना था, इसीलिए इसका लैटिन नाम Sextilis अर्थात छठवां महीना था। बाद में जनवरी और फरवरी जुड़ने पर आठवां महीना होने के बाबजूद यह Sextilis ही प्रचलन में रहा। जूलियस सीजर के पश्चात जब उसका भतीजा ऑक्टेवियन (Octavion) रोम का सम्राट बना तो उसने रोम साम्राज्य की काफी उन्नति की। इससे प्रसन्न होकर तत्कालीन सीनेट ने इनको Augustus (महान, श्रध्दा का पात्र, भव्य) की उपाधि से विभूषित किया। वह अपने चाचा के समान ही ख्याति प्राप्त करना चाहता था। चूंकि ऑक्टेवियन ने Sextilis महीने में अनेक बड़े-2 कार्यों को अंजाम दिए। यह महीना उसके लिए सौभाग्यशाली था। अत: सीनेट ने ऑक्टेवियन की इच्छानुसार Sextilis माह का नाम Augustus रखने का विनिश्चय किया। तभी से यानि 8 ई.पू. से यह माह Augustus कहा जाने लगा।
अंग्रेजी में पहले इस महीने को Weod Monath अर्थात Weed का महीना कहा जाता था। उस समय Weed शब्द आज के अर्थ “घास फूस निकालना, कूड़ा करकट साफ करना आदि” न होकर सामान्य रूप से “हरी पत्तियों आदि” के लिए प्रयुक्त होता था। इस प्रकार यह ’हरी पत्तियों का महीना” था।
9. सितम्बर (September)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह सातवां महीना था। अत: सात के लिए लैटिन शब्द Septem के आधार पर इसे सातवां महीना अर्थात September कहा गया। बाद में जब यह नवां महीना हो गया तब भी इसका नाम September ही रहा। यद्यपि रोम सीनेट इसके पक्ष में नही थी। इसी गड़बड़ी के कारण यूरोप में बहुतों ने इस नाम को नही अपनाया। स्विटजरलैंड में अब भी यह Herbst Monat अर्थात हार्वेस्ट मंथ (जौ का महीना) है। हार्वेस्ट का मूल अर्थ जई या जौ है। पहले अंग्रेजी में भी इसे Haerfest Monath अर्थात “जौ का महीना” ही कहा जाता था।
10. अक्टूबर (October)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह महीना आठवें स्थान पर था। इस आठवें महीने को लैटिन Octo अर्थात आठ के आधार पर October कहा गया था। बाद में जब वर्ष में 12 महीने होने के पश्चात यह 10वें माह के रूप में परिवर्तित हुआ, तब भी इसका नाम October ही प्रचलन में रहा। रोमन सेनापति Germanicus Caesar ने अपने नाम के आधार पर जर्मेनिकस करने का काफी प्रयास किया परन्तु उनकी चल न सकी। इसी प्रकार इस महीने के लिए विभिन्न लोगों ने एंटोनिनस(Antoninus), हरक्यूलियस(Herculeus), कमोडस (Commodus), फास्टिनस(Faustinus) आदि अन्य नाम देने चाहे, परन्तु वह प्रचलन में नही आ सके।
11. नवम्बर (November)प्राचीन रोमन कैलेंडर में यह नवां महीना था। अत: लैटिन Novem अर्थात नौ के आधार पर इस नवें महीने को लैटिन में November या Novembris कहा गया। बाद में वर्ष में 12 महीने हो जाने पर यह 11वां महीना हो गया, तब भी यही नाम प्रचलित रहा।
इसे पहले अंग्रेजी में Blod Monath अथवा Blot Monath अर्थात “रक्त मांस या बलिदान का महीना” कहा जाता था। कुछ लोग तेज हवा बहने के कारण इसे Wind Monath “हवा का महीना” भी कहते थे।
12. दिसम्बर (December)प्राचीन रोमन कैलेंडर में जब वर्ष में दस माह होते थे तो यह दसवां महीना था। लैटिन Decem अर्थात दस के आधार पर इस महीने को December (दिसम्बर) कहा गया। बाद में जब वर्ष में 12 महीने हो गए और इसे 12वें स्थान पर आना पड़ा तब भी इसके नाम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया और यह दिसम्बर ही कहलाया। काफी लोगों ने प्रयास किया कि इसके नाम में परिवर्तन किया जाए परन्तु कोई भी सफल नहीं हो पाया। प्रसिध्द रोमन सम्राट लूसियस अपनी पत्नी के नाम पर इसे Amazonius करना चाहते थे परन्तु तत्कालीन सीनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
पहले अंग्रेजी में इस माह को Mid-Winter-Monath अर्थात मध्य-शीत मास या Winter Monath शीत मास कहा जाता था। ईसाई लोग ईसा के जन्म के कारण इसे Haligh Monath अर्थात “पवित्र मास” कहते थे। जर्मन अब भी इसे Christ Monat कहते हैं।
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